भारतीय किसानों की आत्महत्या : एक विवेचन

Authors

  • डॉ. गायकवाड डी.एस. Author

Abstract

भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में किसान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, किन्तु बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाएँ, अनुचित मूल्य-निर्धारण, साहूकारी शोषण और ऋण के बोझ के कारण उसका जीवन निरंतर संकटग्रस्त होता जा रहा है। मौसम के उतार-चढ़ाव, बैंक व साहूकारों के अत्यधिक ब्याज, महंगे बीज व रसायन तथा बाज़ार की अनिश्चितता के कारण किसान आर्थिक, सामाजिक और मानसिक तनाव से घिर जाता है। परिणामस्वरूप देश के अनेक क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या एक गहरी राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। प्रस्तुत अध्ययन में कृषक जीवन की कठिनाइयों, ऋण-जाल, बाज़ार तंत्र, वैश्वीकरण के प्रभाव और सरकारी नीतियों के संदर्भ में किसान आत्महत्या की समस्या का विश्लेषण किया गया है तथा इसके समाधान हेतु आवश्यक सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

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Author Biography

  • डॉ. गायकवाड डी.एस.

    भूगोल विभागप्रमुख

    श्री संत दामाजी महाविद्यालय, मंगळवेढा

References

(1) अंतिम दशक के हिंदी उपन्यासों में ग्रामीण जीवन का चित्रण-डॉ. मोहम्मद जमील अहमद, अन्नपूर्ण प्रकाशन, कानपुर, पृ.164.

(2) अंतिम दशक के हिंदी उपन्यासों में ग्रामीण जीवन का चित्रण-डॉ. मोहम्मद जमील अहमद, अन्नपूर्ण प्रकाशन, कानपुर, पृ.238. ।

(3) वागार्थ, मासिका पत्रिका, अंक-224. मार्च, 2014. पृ. 66.

४) समालोचन: परख: फास (संजीव): राकेश बिहारी, पृ.3.

(5) www.mediaforright.org 4.2.

(6) समकालीन भारतीय साहित्य-द्वैमासिक पत्रिका, जुलाई-अगस्त, 2011. पू. 204.

Published

25-10-2025

How to Cite

डॉ. गायकवाड डी.एस. , trans. 2025. “भारतीय किसानों की आत्महत्या : एक विवेचन”. IIP : International Multidisciplinary Research Journal 2 (Issue - IV (October-December): 11. https://iipublications.com/iipimrj/article/view/134.

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